जेठालाल - अहमदाबाद की धूप से स्किन मेरी जली...
श्रोतागण : वाह वाह...
अहमदाबाद की धूप से स्किन मेरी जली...
जेठालाल बोले ,” मेहतासाहेब , चुरा के दिल मेरा , बबिता चली....! "
जेठालाल : अगर मेरी शादी मेरी मर्जी से होती...
श्रोतागण : वाह वाह
अगर मेरी शादी मेरी मर्जी से होती...
तो टपुडा , तेरी मम्मी... दया नहीं... बबिता होती...!!
हर शाम सुहानी नहीं होती
श्रोतागण : वाह वाह...
हर चाहत के पीछे...
कहानी नहीं होती...
कुछ तो असर ज़रूर होगा मुहोब्बत में...
वर्ना गोरी बबिता काले अय्यर की दीवानी नहीं होती !!!
एक्झाम के टाईम पे नींद अछ्छी आती है...
श्रोतागण : वाह वाह...
एक्झाम के टाईम पे नींद अच्छी आती है....
जेठालाल के दुकान जाने के टाईमपर ही...
बबिता नीचे क्युँ आती है ?

No comments:
Post a Comment